भारत में और खली पैदा करना ही मेरा उद्देश्य : द ग्रेट खली

द ग्रेट खली उर्फ दिलीप सिंह राणा का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में एक ऐसे इंसान की तस्वीर आती है, जो डब्ल्यूडब्ल्यूई की रिंग में अच्छे-अच्छे पहलवानों को धुल चटाता है । एक ऐसा पहलवान, जिसने अपनी पहली ही फाइट में अंडरटेकर जैसे पहलवान को हराकर तहलका मचा दिया था। खली रिंग में जितने खूंखार है, असल ज़िंदगी में उतने ही सीधे-सादे हैं। खली से बात करते वक्त आपको बिल्कुल नहीं लगेगा कि आप एक डब्ल्यूडब्ल्यूई पहलवान से बात कर रहे हैं। खली 2009 के विशेष ओलंपिक के ब्रांड अंबेसडर भी रह चुके हैं। खली को द पंजाबी मॉन्सटर, द पंजाबी प्लेब्वॉय नाम से भी जाना जाता है। यही नहीं वे ‘द प्रिंस ऑफ द लैंड ऑफ 5 रिवर्स’ के नाम से भी मशहूर हैं।


देवघर समाचार डॉट कॉम के लिए वंदना दुबे को दिये एक साक्षात्कार में ‘द ग्रेट खली’ ने बेबाकी से सभी सवालों का जवाब दिया, इस दौरान उन्होंने डब्ल्यूडब्ल्यूई में कैरियर की शुरूआत से लेकर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ का नाम बदलकर डब्ल्यूडब्ल्यूई होने के बारे में विस्तार से बताया, प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश –
आपने डब्ल्यूडब्ल्यूई में कैरियर की शुरूआत कैसी की ?
मेरे डब्ल्यूडब्ल्यूई के कैरियर की शुरुआत वर्ष 2000 से हुई। पहली बार मैं ट्रेनिंग करने के लिए अमेरिका गया था, उस समय मुझे पता नहीं थी कि यह इंडिपेंडेंट रेसलिंग है या डब्ल्यूडब्ल्यूई की। जब यहां से मैं गया था तो मैंने सोचा था कि सीधा डब्ल्यूडब्ल्यूई की रिंग में जाऊंगा, लेकिन वहां जाकर मुझे पता चला कि पहले यहां मुझे प्रशिक्षण करना होगा। इसके बाद मैंने एक छोटे से एकैडमी में प्रशिक्षण लिया। फिर पता चला कि रेसलिंग में कितना संघर्ष है। इसके बाद मैं जापान गया और वहां तीन साल मैंने प्रशिक्षण लिया, उसके बाद पता चला कि डब्ल्यूडब्ल्यूई का मंच कितना बड़ा है और वहां तक पहुंचने के लिए कितनी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। मैंने भी संघर्ष किया। इस दौरान मेरी पहली फिल्म लांगेस्ट यार्ड भी बनी। वर्ष 2005 में डब्ल्यूडब्ल्यूई से मुझे ऑफर आया। इसके बाद वर्ष 2015 तक मैं डब्ल्यूडब्ल्यूई में रहा।
आपका नाम खली कैसे पड़ा ?
मैं मां काली का भक्त हूं। कुछ लोगों ने मुझे ‘भगवान शिव’ नाम रखने की सलाह दी थी, लेकिन भारत में रहने वाले लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंच न पहुंचे इसलिए मैंने यह सुझाव नकार दिया। इसके बाद कुछ लोगों ने मुझे ‘मां काली’ का नाम सुझाया और उनकी विनाशकारी शक्तियों के बारे में बताया। सबको यह नाम बेहद पसंद आया, लेकिन विदेशियों ने मेरा नाम ‘खली’ रख दिया।
कैरियर के पहले ही फाइट में आपने अंडरटेकर जैसे खतरनाक रेसलर को मात दिया, टेकर के साथ काम करने पर आपको कैसा महसूस हुआ?
मुझे ख़ुशी है कि मेरे करियर के शुरुआत में मुझे अंडरटेकर के साथ काम करने का मौका मिला। ज्यादा लोगों को उनके साथ रेसल करने का मौका नहीं मिलता, मुझे खुशी है की मुझे मौका मिला। अंडरटेकर को हराकर गर्व महसूस हुआ। खासकर भारत से आकर एक लिंजेड रेसलर को मात देना अपने आप-आप में और देश के लिए गर्व की बात रही।
अपने कैरियर के दूसरे साल ही में आप वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियन बन गये। इस उपलब्धि पर क्या कहना चाहेंगे?
आप समझ सकते हैं एक रेसलर को वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियन बनकर कैसा लगेगा। मेरे 35 सालों का ये सबसे ज्यादा गर्व करने वाला पल था। एक भारतीय का डब्ल्यूडब्ल्यूई में लड़ना बहुत बड़ी बात है। मैं तो ख़िताब जीत चूका था वो भी वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियन। मैं अपने आप को लकी समझता हूं, खुशकिस्मत हूं कि 2007 में मैं वर्ल्ड हैविवेट चैम्पियन बना। अब जब भी मैं कहीं जाता हूं तो लोग कहते हैं कि वर्ल्ड हैविवेट चैम्पियन खली आया हैं। मेरे बाद 20-25 वर्ल्ड हैविवेट चैम्पियन बने लेकिन लोग मुझे याद रखते हैं लोग अब भी मानते हैं कि मैं चैम्पियन हूं।
आपके ही कदम पर अब जिंदर महल चल रहे हैं आप उनके लिए क्या कहना चाहेंगे?
मैं जिंदर महल को बधाई देना चाहता हूं। वह मेरे छोटे भाई हैं। देहरादून में रेसलिंग चैम्पियनशिप हुई थीं, जिसमें उन्होंने मेरी कंपनी में काम भी किया था। मैं चाहता हूं कि वह और मेहनत करें और लंबे समय तक डब्ल्यूडब्ल्यूई चैम्पियन का खिताब अपने पास रखें। जिससे देश का नाम रोशन हो और लोगों को उनपर गर्व हो।
अपनी एकेडमी के बारे में कुछ बताइये ?
मेरी एकेडमी पंजाब के जलांधर में हैं। जिसका नाम कॉन्टिनेंटल रेसलिंग एंटरटेनमेंट हैं। एकेडमी में वर्तमान में 10 लड़कियां और 250 लड़के हैं। उन्होंने बताया की स्कूल शुरू करने के पीछे उनका मुख्य उद्देश है युवाओं को रेसलिंग के गुण सीखाना है। मेरा मुख्य उद्देश है युवाओं को शराब और ड्रग से दूर रखकर रेसलिंग की ओर आकर्षित करना है। मैं उन्हें खेल से जोड़ना चाहता हूँ ताकि भारत और ज्यादा खली पैदा कर सके। देश की पहली डब्ल्यूडब्ल्यूई महिला पहलवान कविता भी मेरी ही एकेडमी से ही हैं और उन पर मुझे काफी गर्व है।
भारत में डब्ल्यूडब्ल्यूई का भविष्य कैसा है ?
भारत में डब्ल्यूडब्ल्यूई का भविष्य काफी अच्छा है। अभी ट्रिपल एच भी भारत होके गये हैं और जिंदर महल भी भारत आ रहे हैं। महल का मुम्बई और दिल्ली दोनों जगह कार्यक्रम भी है। भारत में डब्ल्यूडब्ल्यूई का मार्केट काफी अच्छा है।
वर्ल्ड रेसलिंग फेडरेशन यानि डब्ल्यूडब्ल्यूएफ का नाम वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट (डब्ल्यूडब्ल्यूई) कैसे पड़ा?
वर्ल्ड रेसलिंग फेडरेशन यानि डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के नाम पर भी खूब विवाद हुआ था, अंतरराष्ट्रीय एनजीओ वर्ल्डवाइड फंड फॉर नेचर ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ पर उनके ट्रेडमार्क नाम के इस्तेमाल का आरोप लगाया था। फिर केस करने के बाद साल 2002 में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ का नाम बदलकर वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट यानि डब्ल्यूडब्ल्यूई रखा गया।
युवा रेसलर्स और अपने चाहनेवालों के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगे ?
जिन्हें पेशेवर रेसलिंग सीखनी है वें पंजाब में आएं। आप सीडब्ल्यूइ में आइये। कोई फर्क नहीं पड़ता आप पुरुष है या महिला। हम सभी को प्रशिक्षण देंगे। हम प्रतिभाशाली रेसलर्स को बहुत मौके देते हैं। आप बाहर जाना चाहेंगे तो भी आपको मौका मिलेगा। लेकिन अगर आपको भारत में सीखना है तो पंजाब आइये और हमारे साथ सीखिये।
बाकी युवाओं से मैं कहूँगा की आप खेल से जुड़िये, कोई भी खेल से आप जुड़ सकते हैं। गलत चीज़ों से दूर रहिए और देश का गौरव बढ़ाइए।